शुक्रवार 16 अक्टूबर 2026 - 05:13
दिन की हदीस | बीमार की सेवा करने का सवाब

पैगंबर-ए-अकरम (स) ने एक रिवायत में दूसरों की मदद और सेवा करने की अहमियत बयान की है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत मन ला यहज़ुर अल फ़क़ीह किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः

قال النبی صلی‌الله‌علیه‌وآله:

مَنْ سَعَی لِمَرِیضٍ فِی حَاجَةٍ قَضَاهَا أَوْ لَمْ یَقْضِهَا خَرَجَ مِنْ ذُنُوبِهِ کَیَوْمٍ وَلَدَتْهُ أُمُّهُ.

पैगंबर-ए-अकरम (स) ने फ़रमाया:

जो व्यक्ति किसी बीमार की ज़रूरत पूरी करने के लिए प्रयास करता है, चाहे वह उसकी ज़रूरत पूरी कर सके या न कर सके, वह अपने गुनाहों से इस तरह पाक हो जाता है, जैसे उस दिन था जब उसकी माँ ने उसे जन्म दिया था।

मन ला यहज़ुर अल फ़क़ीह, जिल्द 4, पृष्ठ 16।

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